नरसिंहपुर -:जिले में महिला किसानों को कृषि गतिविधियों के साथ-साथ विभिन्न आर्थिक गतिविधियों से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त एवं आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में अभिनव पहल शुरू की गई है। नर्मदा समृद्धि परियोजना के तहत क्लस्टर फार्मिंग मॉडल के माध्यम से स्व-सहायता समूहों की महिलाओं को संगठित कर उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन से जोड़ने की कार्ययोजना तैयार की जा रही है। इस संबंध में कलेक्टर श्रीमती रजनी सिंह की अध्यक्षता में बैठक आयोजित कर परियोजना के क्रियान्वयन एवं आगामी कार्ययोजना पर चर्चा की गई।
परियोजना का उद्देश्य जिले के 6 विकासखंडों में आगामी तीन वर्षों में 10 हजार छोटी एवं सीमांत महिला किसानों को टिकाऊ आर्थिक गतिविधियों से जोड़ते हुए उनकी आय में वृद्धि करना है। इसके लिए एग्रीकल्चर प्रोडक्शन क्लस्टर मॉडल विकसित किए जाएंगे।
स्व-सहायता समूहों की महिलाओं को क्लस्टर फार्मिंग से जोड़ा जाएगा
एनजीओ प्रदान की टीम लीड कृष्णा तिवारी ने बताया कि क्लस्टर फार्मिंग के तहत स्व-सहायता समूहों की महिलाओं के साथ एसोसिएट होकर उन्हें संगठित रूप से कृषि एवं अन्य आर्थिक गतिविधियों से जोड़ा जाएगा। महिलाओं को समूह के रूप में उत्पादन की योजना बनाने, आवश्यक इनपुट की सामूहिक खरीदी, तकनीकी जानकारी प्राप्त करने तथा उत्पादों के सामूहिक विपणन के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे।उन्होंने बताया कि इस पहल का उद्देश्य महिलाओं को केवल खेती तक सीमित रखना नहीं, बल्कि विभिन्न आर्थिक गतिविधियों के माध्यम से उनकी आय के स्रोतों को बढ़ाना और उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है। गांव स्तर पर लगभग 40-50 महिला किसानों के प्रोड्यूसर ग्रुप बनाए जाने की परिकल्पना है, जो उत्पादन योजना, क्षमता निर्माण, इनपुट एक्सेस और सामूहिक मार्केटिंग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
खेती के साथ पशुपालन, मशरूम, मत्स्य और अन्य गतिविधियों पर जोर
क्लस्टर के अंतर्गत क्षेत्र की क्षमता और बाजार की मांग के अनुसार फल उत्पादन, उच्च मूल्य वाली सब्जियां, दालें, तिलहन और मसालों को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके साथ ही मशरूम उत्पादन, मत्स्य पालन, बैकयार्ड बकरी पालन, डेयरी तथा अन्य छोटे उद्यमों को भी महिलाओं की आय का अतिरिक्त स्रोत बनाया जाएगा। इको-टूरिज्म के अंतर्गत होम-स्टे जैसी गतिविधियों को भी प्रोत्साहित करने का प्रस्ताव है।
उत्पादन से बाजार तक महिलाओं की भागीदारी
इस पहल के तहत महिलाओं को उत्पादन के साथ ग्रेडिंग, सॉर्टिंग, मूल्य संवर्धन, प्रसंस्करण, भंडारण और विपणन से जोड़ने पर विशेष जोर दिया जाएगा। सामुदायिक नर्सरी, संरक्षित खेती, सूक्ष्म सिंचाई, भंडारण एवं ग्रेडिंग-सॉर्टिंग केंद्र जैसी सुविधाओं के माध्यम से उत्पादन की गुणवत्ता और बाजार तक पहुंच बेहतर बनाने की योजना है।
विभिन्न विभागों के सहयोग से होगा क्रियान्वयन
कृष्णा तिवारी ने बताया कि इस पूरी पहल में विभिन्न विभागों का सहयोग एवं योजनाओं का अभिसरण लिया जाएगा, ताकि महिलाओं को कृषि, उद्यानिकी, सिंचाई, ग्रामीण विकास, मत्स्य पालन, पर्यटन सहित संबंधित क्षेत्रों की योजनाओं का लाभ मिल सके। जिला एवं ब्लॉक स्तर पर समन्वय के माध्यम से आवश्यक संसाधन, तकनीकी सहायता, अधोसंरचना और बाजार संपर्क उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य किया जाएगा।
परियोजना के तहत पहले मॉडल क्लस्टर विकसित कर उसकी सफलता के आधार पर इसे व्यापक स्तर पर लागू करने की कार्ययोजना है। कलेक्टर श्रीमती सिंह ने कहा कि यह पहल नरसिंहपुर की ग्रामीण महिलाओं को कृषक से कृषि उद्यमी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है, जहां समूह की शक्ति के माध्यम से उत्पादन, मूल्य संवर्धन और बाजार तक पहुंच को मजबूत करते हुए महिलाओं के लिए स्थायी एवं विविध आय के अवसर तैयार किए जाएंगे। बैठक में सीईओ जिला पंचायत श्री गजेन्द्र सिंह नागेश, अपर कलेक्टर श्री अरविंद सिंह सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे।
संवाददाता - रामबाबू पटेल, जिला नरसिंहपुर(मध्यप्रदेश)
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