देवरीकलां-: कहते हैं कि मेहनत और हौसले के आगे कठिन से कठिन परिस्थितियां भी छोटी पड़ जाती हैं। ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी एक साधारण किसान परिवार की बेटी की है,जिसने गरीबी और अभावों के बीच संघर्ष करते हुए आखिरकार प्राथमिक शिक्षक के पद पर चयनित होकर सफलता हासिल की।
लड़की के पिता एक छोटे किसान हैं,जिनके पास मात्र करीब 2 एकड़ जमीन है। सीमित खेती से ही परिवार का भरण-पोषण होता था। परिवार में 6 भाई-बहन होने के कारण आर्थिक स्थिति हमेशा कमजोर रही। घर की जिम्मेदारी और बच्चों के पालन-पोषण में मां ने भी दिन-रात मेहनत की और कठिन परिस्थितियों में भी बच्चों की पढ़ाई नहीं रुकने दी।अभावों के बीच पढ़ाई करना आसान नहीं था,लेकिन बेटी ने हार नहीं मानी। इसी दौरान एक सामाजिक संस्था उसकी मदद के लिए आगे आई और पढ़ाई से लेकर अन्य जरूरी जरूरतों में हर संभव सहयोग किया। इस सहयोग और अपने अथक परिश्रम के दम पर उसने पढ़ाई जारी रखी और आज प्राथमिक शिक्षक पद पर चयनित होकर अपने परिवार और क्षेत्र का नाम रोशन किया है।उसकी सफलता से परिवार में खुशी का माहौल है। माता-पिता की आंखों में गर्व के आंसू हैं। गांव के लोग भी इस बेटी की मेहनत और लगन की सराहना कर रहे हैं।इस प्रेरणादायक सफर में समाजसेवी संजय ब्रजपुरिया, अनिल ढिमोले और डॉ. अवनीश मिश्रा का विशेष योगदान रहा। इन सभी ने समय-समय पर छात्रा की पढ़ाई,मार्गदर्शन और आवश्यक संसाधनों में सहयोग प्रदान किया। उन्होंने न केवल आर्थिक और शैक्षणिक सहायता दी,बल्कि कठिन समय में उसका हौसला भी बढ़ाया। समाजसेवा के प्रति उनकी यह भावना क्षेत्र के लिए प्रेरणादायक मानी जा रही है।
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर यह सफलता और भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। यह कहानी इस बात का संदेश देती है कि यदि बेटियों को अवसर,सहयोग और सही मार्गदर्शन मिले तो वे किसी भी क्षेत्र में सफलता का परचम लहरा सकती हैं।यह कहानी केवल एक बेटी की सफलता नहीं,बल्कि उस संघर्ष,माता-पिता के त्याग और समाज के सहयोग की भी मिसाल है,जिसने मिलकर एक सपने को साकार किया। आज यह बेटी न सिर्फ अपने परिवार के लिए गर्व का कारण बनी है,बल्कि क्षेत्र की अन्य बेटियों के लिए भी प्रेरणा बन गई है।
संवाददाता - रामबाबू पटेल देवरी कला, जिला सागर (मध्यप्रदेश)
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